भारतीय कारोबार के लिए एसेट ट्रैकिंग

एसेट ट्रैकिंग सॉफ्टवेयर: कंपनी का हर सामान, एक ही जगह

किसके पास कौन-सा लैपटॉप है, किस मशीन की AMC अगले महीने ख़त्म हो रही है, ऑडिट में कौन-सी चीज़ नहीं मिली – ये सब अब Excel और पुराने रजिस्टर में ढूँढने की ज़रूरत नहीं। Assets Tracker में हर सामान फोटो के साथ दर्ज होता है, उस पर QR लेबल लगता है, और फोन के कैमरे से स्कैन करते ही उसका पूरा रिकॉर्ड खुल जाता है।

  • 15 दिन फ्री ट्रायल
  • 5 लोग
  • क्रेडिट कार्ड की ज़रूरत नहीं

ये परेशानियाँ जानी-पहचानी लगती हैं?

  • कर्मचारी नौकरी छोड़ता है, और पता ही नहीं कि उसके पास लैपटॉप के साथ चार्जर, माउस और बैग भी था।
  • प्रोजेक्टर या कैमरा "दो दिन के लिए" ले गए थे, दो महीने हो गए।
  • AC, UPS या मशीन की AMC कब ख़त्म हुई, ये ख़राबी आने पर ही पता चलता है।
  • साल के आख़िर में ऑडिटर फिज़िकल वेरिफिकेशन माँगता है, और पूरी टीम एक हफ़्ता लिस्ट लेकर घूमती है।
  • कंप्यूटर में RAM या SSD बदल दी गई, पर किसी को याद नहीं कि पुराना पार्ट कहाँ गया।
  • प्रिंटर का टोनर या दफ़्तर का ज़रूरी सामान ठीक उसी दिन ख़त्म होता है जिस दिन सबसे ज़्यादा ज़रूरत हो।

Assets Tracker इन्हीं रोज़ की दिक़्क़तों के लिए बना है – सीधा-सादा, फोन पर चलने वाला, और भारतीय कारोबार के हिसाब से।

किसके लिए है?

जहाँ भी सामान ज़्यादा है और लोग कई हैं, वहाँ काम आता है। हर सेक्टर के लिए अलग पेज (अंग्रेज़ी में) भी है:

मुख्य सुविधाएँ

  • फोटो के साथ एसेट रजिस्टर

    हर एसेट के साथ कम से कम एक फोटो। कैटेगरी, ब्रांच, विभाग (डिपार्टमेंट) और कर्मचारी – सब एक जगह।

  • देना, उधार देना, वापस लेना

    रोज़ के इस्तेमाल के लिए सामान असाइन करें, या कुछ दिनों के लिए वापसी की तारीख़ के साथ चेक-आउट करें। एक चीज़ हो या पूरा सेट (जैसे लैपटॉप, चार्जर, माउस, बैग) – एक साथ।

  • हैंडओवर की पुष्टि

    सामान मिलने पर कर्मचारी एक लिंक खोलकर कोड से पुष्टि करता है। बाद में "मुझे मिला ही नहीं" वाली बहस ख़त्म।

  • QR और बारकोड लेबल

    QR और Code 128 बारकोड वाले लेबल। A4 शीट पर 70×37 मिमी (एक शीट पर 24) या छोटे 38×21 मिमी (एक शीट पर 65), या थर्मल रोल पर। कितने भी लेबल एक बार में, कैटेगरी के हिसाब से नंबर – जैसे VG/CPU/001।

  • फोन से स्कैन

    अलग स्कैनर की ज़रूरत नहीं। फोन का कैमरा लेबल स्कैन करता है।

  • डेस्कटॉप CPU के पार्ट्स

    हर डेस्कटॉप के 11 पार्ट्स – प्रोसेसर, RAM, SSD, ग्राफ़िक्स कार्ड, पावर सप्लाई वगैरह – और कौन-सा पार्ट कब बदला, इसका पूरा इतिहास।

  • स्टॉक और कंज़्यूमेबल

    सामान आया, सामान गया, कितना बचा – और स्टॉक कम होने पर अलर्ट।

  • मरम्मत, वारंटी और AMC

    हर सामान की मरम्मत का रिकॉर्ड, और वारंटी या AMC ख़त्म होने से पहले ईमेल से रिमाइंडर।

  • सॉफ्टवेयर लाइसेंस

    सॉफ्टवेयर लाइसेंस का रिकॉर्ड भी हार्डवेयर के साथ ही रखें।

  • डेप्रिसिएशन

    इनकम टैक्स एक्ट और कंपनीज़ एक्ट – दोनों के हिसाब से डेप्रिसिएशन।

  • स्कैन करके फिज़िकल ऑडिट

    ब्रांच-दर-ब्रांच ऑडिट – लेबल स्कैन करते जाइए, कौन-सा सामान अभी तक नहीं मिला, वो अलग दिखता है।

  • डिस्पोज़ल से पहले मंज़ूरी

    कोई सामान बेचने, कबाड़ में देने या राइट-ऑफ करने से पहले मंज़ूरी ज़रूरी।

कौन क्या देख सकता है

  • मालिक (Owner): पूरा कंट्रोल।
  • एसेट मैनेजर: एसेट से जुड़ा रोज़ का काम संभालता है।
  • कर्मचारी: सिर्फ़ अपने नाम का सामान देखता है।
  • ऑडिटर: सब कुछ देख सकता है, बदल कुछ नहीं सकता।
  • Excel से शुरुआत: पुरानी लिस्ट Excel से कॉपी करके पेस्ट करें, और कभी भी Excel या PDF में निकालें।
  • 13 भारतीय भाषाएँ: हिंदी, अंग्रेज़ी, मराठी, बांग्ला, तेलुगु, तमिल, गुजराती, कन्नड़, मलयालम, पंजाबी, ओड़िया, असमिया और उर्दू।
  • फोन पर: फोन के ब्राउज़र में और Android ऐप में चलता है। लाइट और डार्क मोड दोनों।

आपका डेटा सुरक्षित

  • डेटा भारत में, मुंबई के सर्वर पर रखा जाता है।
  • हर रात बैकअप होता है।
  • किसी नए फोन या कंप्यूटर से लॉग इन करने पर ईमेल पर कोड आता है – उसके बिना लॉग इन नहीं होता।

शुरू कैसे करें – चार आसान कदम

  1. फ्री ट्रायल शुरू करें

    15 दिन, 5 लोग, क्रेडिट कार्ड नहीं।

  2. पुरानी लिस्ट डालें

    Excel से एसेट की लिस्ट कॉपी करके पेस्ट करें, और कैटेगरी, ब्रांच, विभाग और कर्मचारी बना लें।

  3. लेबल छापें और लगाएँ

    एक कैटेगरी के सारे लेबल एक साथ छापें, सामान पर चिपकाएँ और उसी समय उसकी फोटो ले लें।

  4. सामान सौंपें

    हर सामान उसके ज़िम्मेदार कर्मचारी को असाइन करें, और वो लिंक से पुष्टि कर दे। बस, आपका रजिस्टर तैयार।

रजिस्टर में कौन-से कॉलम होने चाहिए, ये जानने के लिए हमारी फिक्स्ड एसेट रजिस्टर फॉर्मेट गाइड (अंग्रेज़ी में) देखें। डेप्रिसिएशन समझना हो तो कंपनीज़ एक्ट बनाम इनकम टैक्स एक्ट गाइड पढ़ें या फ्री डेप्रिसिएशन कैलकुलेटर इस्तेमाल करें।

प्लान और कीमत

सभी कीमतें 18% GST से पहले की हैं। सालाना प्लान लेने पर 2 महीने मुफ़्त।

  • Starter

    ₹799 / महीना

    या ₹7,999 / साल

    • 5 यूज़र
    • 500 एसेट
    • 5 GB स्टोरेज
  • Business

    ₹2,999 / महीना

    या ₹29,999 / साल

    • 40 यूज़र, 15,000 एसेट, 50 GB
    • Growth की सारी सुविधाएँ
    • डिस्पोज़ल से पहले मंज़ूरी
    • ब्रांच के हिसाब से मैनेजर
    • प्राथमिकता से सपोर्ट
  • Enterprise

    कस्टम

    बड़ी कंपनियों के लिए

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या फ्री ट्रायल के लिए क्रेडिट कार्ड चाहिए?

नहीं। 15 दिन का फ्री ट्रायल है, जिसमें 5 लोग इस्तेमाल कर सकते हैं। कोई क्रेडिट कार्ड नहीं माँगा जाता।

क्या ये हिंदी में चलता है?

हाँ। Assets Tracker 13 भारतीय भाषाओं में है – हिंदी, अंग्रेज़ी, मराठी, बांग्ला, तेलुगु, तमिल, गुजराती, कन्नड़, मलयालम, पंजाबी, ओड़िया, असमिया और उर्दू।

हमारी पुरानी लिस्ट Excel में है। क्या सब दोबारा टाइप करना होगा?

नहीं। Excel से लाइनें कॉपी करके सीधे पेस्ट कर दें। बाद में पूरा रजिस्टर Excel या PDF में निकाल भी सकते हैं।

क्या iPhone पर चलेगा?

iPhone के लिए अलग ऐप अभी नहीं है, लेकिन iPhone के ब्राउज़र में Assets Tracker चलता है। Android के लिए ऐप है।

क्या ये Tally से जुड़ता है?

अभी नहीं। Tally एक्सपोर्ट या दूसरे सॉफ्टवेयर से जोड़ने की सुविधा अभी नहीं है। आप रिपोर्ट Excel या PDF में निकालकर अपने CA या अकाउंटेंट को दे सकते हैं।

हमारा डेटा कहाँ रखा जाता है?

भारत में, मुंबई के सर्वर पर। हर रात बैकअप होता है, और नए डिवाइस से लॉग इन करने पर ईमेल पर कोड आता है।

डेप्रिसिएशन किस हिसाब से निकलता है?

इनकम टैक्स एक्ट और कंपनीज़ एक्ट – दोनों के हिसाब से। ये सुविधा Growth प्लान और उससे ऊपर के प्लान में है।

आज ही अपना एसेट रजिस्टर बनाइए

एक कैटेगरी से शुरू करें – जैसे लैपटॉप। लिस्ट पेस्ट करें, लेबल छापें, और कर्मचारियों से पुष्टि लें। बाक़ी सामान उसी तरह जुड़ता जाएगा।

  • 15 दिन फ्री ट्रायल
  • 5 लोग
  • क्रेडिट कार्ड की ज़रूरत नहीं